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    Mere ansu uski muskurahat

    अजीब सी कश्मकश रहती है दिल में ए शायर आज कल ,
    समझ नही आता उसकी मुस्कराहट को ज्यादा तबज़्ज़ो दू या मेरे आंसुओ को ।

    Ajeeb si kashmkash rehti hai dil me e shayar aaj kal ,
    Samajh nahi aata uski muskurahato ko jyada tabazzo du ya mere ansuo ko .